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नव नाग स्तोत्रम् अनंतं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कंबलम् । फलशृति । संतानं प्राप्यते नूनं संतानस्य च रक्षकाः । सर्पदर्शनकाले वा पूजाकाले च यः पठेत् । ॐ नागराजाय नमः प्रार्थयामि नमस्करोमि ॥ इति नवनाग स्तोत्रम् । |