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मार्गबन्धु स्तोत्रम्

शम्भो महादेव देव शिव शम्भो महादेव देवेश शम्भो
शम्भो महादेव देव

फालावनम्रकिरीटं फालनेत्रार्चिषा दग्ध पञ्चेषुकीटम्।
शूलाहतारातिकूटं शुद्धमर्धेन्दुचूडं भजे मार्गबन्धुम्॥ (शम्भो)

अङ्गे विराजद्भुजङ्गं अभ्र गङ्गा तरङ्गाभि रामोत्तमाङ्गम्।
ओङ्कारवाटी कुरङ्ग सिद्ध संसेविता इ भजे मार्गबन्धुम् ॥ (शम्भो)

नित्यं चिदानन्दरूपं निह्नताशेष लोकेश वैरिप्रतापम् ।
कार्तस्वरागेन्द्र चापं कृत्तिवासं भजे दिव्य सन्मार्गबन्धुम्॥ (शम्भो)

कन्दर्प दर्पघ्नमीशं कालकण्ठं महेशं महाव्योमकेशम्।
कुन्दाभदन्तं सुरेशं कोटिसूर्यप्रकाशं भजे मार्गबन्धुम् ॥ (शम्भो)

मन्दारभूतेरुदारं मन्दरागेन्द्रसारं महाघौर्यदूरम्।
सिन्धूर दूर प्रचारं सिन्धुराजातिधीरं भजे मार्गबन्धुम्॥ (शम्भो)

अप्पय्ययज्वेन्द्रगीतं स्तोत्रराजं पठेद्यस्तु भक्त्या प्रयाणे।
तस्यार्थसिदिं विधत्ते मार्गमध्येऽभयं चाशुतोषी महेशः॥ (शम्भो)




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